Monday, January 7, 2013

मुझे तुम और मुश्किल में न डालो
मेरे चेहरे से ये नज़रें हटा लो

अगर ज़ालिम का कुछ न कर सको तो
कम-अज़-कम आसमां  सर पे उठा लो

ख़बर में तुम नहीं कितने दिनों से
दबा-कुचला कोई मुदआ उछालो

चलो हम पैर रखते हैं दोबारा
चलो जल्दी से तुम आँखें बिछा लो

ये बरसों की मुहब्बत का सिला हैं
लो! मेरी आँख के आंसू संभालो

1 comment:

  1. चलो हम पैर रखते हैं दोबारा
    चलो जल्दी से तुम आँखें बिछा लो
    .
    ये भाव पहली बार पढ़ने को मिला , बहुत ही सुन्दर , ये लाइन तो विशेष |

    सादर

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